’बाहरी’ विजय बहुगुणा की भाजपा में बुरी गत

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पार्टी के ही कार्यक्रम में कार्यकत्री ने की बहुगुणा पर अभद्र टिप्पणी

रायपुर विधायक उमेश शर्मा ने अध्यक्ष को पत्र लिख जताई नाराजगी
देहरादूनः विजय बहुगुणा के लिए भाजपा गरम दूध बन चुकी है। पूर्व सासंद, पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता होने के बावजूद उन्हें पार्टी में अपेक्षित तवज्जो नहीं मिल पा रही है। कांग्रेस से भाजपा में आए बहुगुणा को भाजपा के ही अनेक नेता पचा नहीं पा रहे हैं। इस बात का एक प्रमाण यह है कि हाल ही में पार्टी के एक कार्यक्रम में एक कार्यकत्री द्वारा उनके खिलाफ ’अभद्र भाषा’ का इस्तेमाल किया गया। इस पर रायपुर विधायक ने उमेश शर्मा काऊ ने पार्टी अध्यक्ष को पत्र लिखकर नाराजगी जाहिर की है। वैसे अब यह बात स्पष्ट हो गयी है कि विजय बहुगुणा पर लगा ’बाहरी’ होने का दाग आसानी से धुलने वाला नहीं। पार्टी भी उन पर विश्वास नहीं कर पा रही है। यही कारण है कि उन्हें भाजपा ने राज्यसभा नहीं भेजा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और समय में दिग्गज नेता रहे हेमवती नंदन बहुगुणा के पुत्र विजय बहुगुणा ने नब्बे के दशक के अंत में उत्तराखंड की राजनीति में कदम रखा था। मुख्यमंत्री रहते 2013 में उनकी छवि पर बट्टा लग गया। केदारनाथ आपदा प्रबंधन मंे अनेक खामियों के चलते विजय बहुगुणा फिसड्डी साबित हो गए। उन्हें हाईकमान से कुर्सी से हटाकर हरीश रावत को बिठा दिया। इसके बाद तो विजय बहुगुणा की स्थिति और बुरी होती गयी। कांग्रेस में अपना भविष्य अंधकारमय देख वे भाजपा में आ गए, लेकिन भाजपा ने उन्हें वह तवज्जो नहीं दी, जिसकी बहुगुणा ने उम्मीद की थी। बताया जाता है कि कांग्रेस से भाजपा में आए अनेक आला नेता अभी भी बहुगुणा के कट्टर समर्थक हैं और अंदर ही अंदर उन्हें आगे बढ़ाने की फिराक में रहते हैं, लेकिन भाजपा को यह पसंद नहीं है। यह भी बताया जाता है कि कांग्रेस से भाजपा में आए कुछ हाला नेताओं ने हाल ही में विजय बहुगुणा को राज्यसभा भेजने का दबाव भी बनाया, लेकिन पार्टी हाईकमान ने इसे गंभीरता से न लेते हुए नरेश बंसल को यह अवसर दे दिया।
शायद इसके बाद विजय बहुगुणा और उनके समर्थकों को बड़ा झटका लग गया होगा। बताया जाता है कि पार्टी का एक बड़ा धड़ा बहुगुणा एंड पार्टी की भाजपा में मौजूदगी को पचा नहीं पा रहा है। हाल ही में इसकी एक बानगी देखने को मिल चुकी है। पार्टी के एक कार्यक्रम में एक कार्यकत्री ने केदारनाथ आपदा को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से ’अभद्र’ टिप्पणी कर डाली। इस पर रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ ने पार्टी अध्यक्ष वंशीधर भगत को पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने लिखा कि एक कार्यकत्री ने विजय बहुगुणा पर टिप्पणी की-’’जब भी वह केदारनाथ जाएगा तो आपदा में दबे शव उसको नोंच-नोंच कर खायेंगे’’। श्री काऊ ने लिखा कि पार्टी के प्रशिक्षण शिविर में पार्टी के वरिष्ठ नेता के लिए इस प्रकार के शब्दों का इस्तेमाल करना अनुशासनहीनता है। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जतायी कि कार्यक्रम में मंचासीन महानगर अध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष ने न तो वक्ता को इस पर रोका और न ही इस पर खेद जताया।
अब यह बात गौर करने वाली होगी कि पार्टी इस पत्र पर क्या कदम उठाती है। यदि मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है कि तो यह समझा जाना चाहिए कि पार्टी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और वह विजय बहुगुणा को महत्त्व नहीं दे रही है। एक प्रकार से पार्टी के कदम से पार्टी में विजय बहुगुणा की स्थिति का भी पता चल जाएगा। वैसे वरिष्ठ नेता विजय बहुगुणा के लिए यदि भाजपा में वास्तव में स्थिति खराब है तो भी उन्हें घुट-घुटकर यहीं रहना होगा, क्योंकि कांग्रेस में उनकी वापसी आसान नहीं है, क्योंकि वहां हरीश नेता विजय बहगुणा के धुर विरोधी माने जाते हैं और वे विजय बहुगुणा की वापसी को पचा नहीं पाएंगे। यदि किसी प्रकार बहुगुणा कांग्रेस में चले भी गए तो उनकी स्थिति वहां भी ऐसी ही हो जाएगी, जैसी वर्तमान में भाजपा में है।

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