बहुत देर हो चुकी, अब न टलें परीक्षाएं

 सितंबर में नीट और जेईई के इंट्रेस को लेकर विभाग गंभीरकेंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. ’निशंक’ बोले-हमारी चिंता के केंद्र में छात्र

देहरादूनः नीट और जेईई परीक्षा को भले ही विपक्ष ने राजनीतिक मुद्दा बना दिया हो, लेकिन हकीकत यह है कि यह युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। यह परीक्षा न हुई तो युवाओं को बहुत नुकसान होगा। सोचिए! जो छात्र-छात्राएं दो-तीन साल से कड़े परिश्रम और पैसा खर्च कर इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, वे कितने आहत होंगे? यदि बात छात्रों के स्वास्थ्य की सुरक्षा की है तो यहां बता दें कि दिल्ली में मेट्रो चलने को तैयार है, जहाज की उड़ानें कई दिनों से अनवरत जारी हैं, लोग निजी वाहनों से देशभर में यात्राएं कर रहे हैं, तब भी तो हालात नियंत्रित हैं। और छात्रों के स्वास्थ्य की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी वैसे भी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की है। इन परिस्थितियों में इन परीक्षाओं को टालने की बात करना एक प्रकार से बच्चों को भविष्य को पीछे धकेलना है।
नेशनल इलिजिबिटी कम इंट्रेस टेस्ट यानी नीट यूजी परीक्षा उन छात्रों के लिए होती है, जो सरकारी और निजी काॅलेजों से मेडिकल में अंडरग्रेजुएट कोर्स-एमबीबीएस या बीडीएस करना चाहते हैं। यह परीक्षा इस बार कोरोना महामारी के कारण 13 सितंबर को तय की गई है। इसी प्रकार जेईई यानी ज्वाइंट इंट्रेस एग्जामिनेशन, इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा है। जो देश के विभिन्न इंजीनियरिंग काॅलजों में दाखिले के लिए करायी जाती है। इसकी जेईई मैन्स और जेईई एडवांस्ड दो परीक्षाएं होती हैं। इसकी एडवांस्ड की परीक्षा इस बार 27 सितंबर को निर्धारित है।


भारत में कोरोना महामारी का असर इन परीक्षाओं पर भी पड़ा है। छात्र-छात्राएं उम्मीदों के साथ दो-तीन साल से इसकी तैयारी कर रहे थे कि मार्च में कोरोना की दस्तक ने वे असमंजस में पड़ने लगे। छात्रों के सामने बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य दोनों की चिंताएं हैं। वह दोनों को महत्त्व दे रही है। सरकार नहीं चाहती कि यह सत्र जीरो अकेडमिक सेशन हो, ताकि छात्रों का एक साल का बहुमूल्य समय बेकार न चला जाए। इससे शिक्षा व्यवस्था का पूरा ढर्रा बिगड़ जाएगा। उधर, विपक्षी पार्टियां इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर सितंबर में नीट और जेईई की परीक्षाएं किए जाने का विरोध कर रही हैं, जबकि हकीकत यह है कि अधिकांश बच्चे अथवा अभिभाव सुरक्षा के साथ परीक्षाएं जाने के पक्षधर हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि पहले पांच घंटों में जेईई के लगभग साढ़े आठ लाख परीक्षार्थियों में से लगभग साढ़े सात लाख परीक्षार्थी अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर चुके हैं और 332 परीक्षार्थियों ने अपने केंद्र के शहरों को बदलने का आग्रह किया है। वहीं, नीट के लगभग 16 लाख परीक्षार्थियों में से लगभग सात लाख परीक्षार्थी अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर चुके हैं।
चूूंकि इस महामारी के खत्म होने का अभी कोई निश्चित पता नहीं है, इसलिए सरकार अथवा विभाग इसमें अब और अधिक देरी नहीं करना चाहता है। इसलिए परीक्षाओं की तैयारी युद्धस्तर पर की जा रही है।
शिक्षाविद् डाॅ. दिनेश चन्द्र पाण्डेय कहते हैं कि इन परीक्षाओं का सितंबर में आयोजन किया जाना सही निर्णय है। इनमें अब अधिक देरी न करना छात्र हित में है।
इस संबंध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल ’निशंक’ का कहना है कि हमारे लिए छात्रों की सुरक्षा और भविष्य दोनों महत्त्वपूर्ण हैं। छात्र हमारी हमारी चिंता के केंद्र में है। हम सोच-समझकर फैसला ले रहे हैं। इस मसले पर राजनीति करना ठीक नहीं। अभिभावकों और बच्चों को एनटीए के सुरक्षा बंदोबस्त पर विश्वास रखना चाहिए। डाॅ. ’निशंक’ के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के आदेश तथा छात्रों एवं अभिभावकों के आग्रह के बाद ही हमें ऐसा करना पड़ा है। मुझे पूरा विश्वास है कि हम इन परीक्षाओं को सुचारु रूप से संपन्न कराएंगे।

(डाॅ. वीरेंद्र बर्त्वाल )

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