शिक्षा मंत्रालय को लेकर अधिसूचना जारी की।

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नई दिल्ली। पैंतीस वर्षों का इतिहास बदल गया। मानव संसाधन विकास मंत्राल un hnय का नाम ’शिक्षा मंत्रालय’ कर दिया गया है। भारत सरकार ने इसका बाकायदा गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

25 सितंबर, 1985 तक इस मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय ही था। भारत सरकार (व्यवसाय का आवंटन) नियम 1961 के 174वें संशोधन के माध्यम से 26 सितंबर, 1985 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय का सृजन अथवा गठन किया गया था। मंत्रालय दो विभागों के माध्यम से कार्य करता है-पहला स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग तथा दूसरा उच्चतर शिक्षा विभाग। विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, दूर शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, नियोजन, यूनेस्को (यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल आॅर्गनाइजेशन), एकीकृत विभाग ये सभी इस मंत्रालय के अधीन हैं।
केंद्रीय कैबिनेट रैंक वाले मंत्री इसे संभालते हैं। वर्तमान में डाॅ. रमेश पोखरियाल ’निशंक’ इसके कैबिनेट तथा संजय शामराव धोत्रे राज्यमंत्री हैं।
मंत्रालय का मुख्य कार्य शिक्षा पर राष्ट्रीय नीति तैयार करना तथा देश में छात्रों तक शिक्षण संस्थानों की पहुंच एवं उनका विकास करना आदि है। शिक्षा मानव संसाधन विकास का सार है। शिक्षा राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मानव संसाधन के विकास का सार शिक्षा से संबंधित मामलों का मंत्रालय होने के कारण ही संभवतः इस मंत्रालय का नाम मानव संसाधन विकास मंत्रालय कर दिया गया हो, लेकिन केंद्र में दूसरी बार बनी नरेंद्र मोदी नीत भाजपा सरकार ने इस बार इस मंत्रालय का नाम बदलकर अब शिक्षा मंत्रालय कर दिया है। यह नाम काम के अनुरूप बहुत मेल खाता है, क्योंकि मंत्रालय का कार्य गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध करवाना, शिक्षा तक छात्रों की पहुंच और शिक्षा का उन्नयन करवाना है। मंत्रालय के केंद्र में भी शिक्षा ही और उसका उद्देश्य देश के सभी नागरिकों को न केवल शिक्षित करना, अपितु उचित और उपयुक्त शिक्षा देना है। इसलिए इसका नाम ’शिक्षा मंत्रालय’ अत्यंत समीचीन प्रतीत होता है। उधर, मानव संसाधन से तात्पर्य देश के नागरिकों से है। देखा जाए तो यह मंत्रालय सीधे तौर पर मानव संसाधन से नहीं, अपितु शिक्षा से जुड़ा है। शिक्षा का विकास होने के बाद ही नागरिकों का विकास संभव है। दूसरे शब्दों में शिक्षा के उन्नयन के बाद ही नागरिक का उन्नयन होता है। अतः इस मंत्रालय का नाम ’शिक्षा मंत्रालय’ ही उपयुक्त है। 17 अगस्त, 2020 को भारत सरकार ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर ’शिक्षा मंत्रालय’ रख दिए जाने की अधिसूचना जारी कर दी है।
गौरतलब है कि देश की शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन के उद्देश्य से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का सृजन किया गया है। इसे लागू करने की जोर-शोर से कवायद चल रही है। डाॅ. रमेश पोखरियाल ’निशंक’ का उद्देश्य इस नीति के माध्यम से भारत को समृद्ध, विकसित और श्रेष्ठ राष्ट्र बनाना है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम परिवर्तन नई शिक्षा नीति की आहट मानी जा सकती है। शिक्षा डाॅ. ’निशंक’ का प्रिय विषय रहा है। लंबा राजनीतिक अनुभव रखने वाले निशंक डाॅ. ’निशंक’ राजनीति के क्षेत्र में आने से पहले अध्यापक थे। अनेकों पुस्तकों के सर्जक डाॅ. पोखरियाल देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों की श्रेणी में शुमार हैं। वे दो बार उत्तर प्रदेश सरकार और दो बार उत्तराखंड की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। उत्तराखंड के पांचवें मुख्यमंत्री बनने का गौरव भी उन्हें हासिल है। दो बार हरिद्वार क्षेत्र से सांसद चुने जाने के बाद डाॅ. ’निशंक’ को मोदी सरकार ने इस बार मानव संसाधन विकास मंत्रालय (अब शिक्षा मंत्रालय) जैसे महत्त्वपूर्ण विभाग की बागडोर सौंपी है। इस मंत्रालय में राज्यमंत्री संजय शामराव धोत्रे महाराष्ट्र के अकोला क्षेत्र से सांसद हैं। वे राजनीतिज्ञ के इतर इंजीनियर, उद्योगपति और कृषि विशेषज्ञ भी हैं। गौरतलब है कि भाजपा शासन में इससे पहले स्मृति जुबिन ईरानी और प्रकाश जावड़ेकर इस मंत्रालय को संभाल चुके हैं। डाॅ. रमेश पोखरियाल ’निशंक’ अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा संजय शामराव धोत्रे अब केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री कहलाएंगे।

(डॉ. वीरेन्द्र बर्त्वाल)

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