बारह लाख आचार्यों से एक साथ संवाद।

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नैक के ’आचार्य देवो भवः’ कार्यक्रम में कुलपतियों, प्रोफेसरों को डाॅ. निशंक ने किया संबोधित

देहरादूनः कोविड-19 देश-दुनिया में जनजीवन के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न तो कर कर गया, लेकिन बुद्धिमान लोग इस विपरीत और विषम परिस्थिति का भी लाभ उठाने में सफल रहे। बात शैक्षिक जगत की करें तो शिक्षक, प्रोफेसर, विषय विशेषज्ञ से लेकर विद्यार्थी तक इस आपदा को अवसर में बदलने में कामयाब रहे। वेबिनार हो या फिर आॅनलाइन टीचिंग अथवा महत्त्पूर्ण मसले पर बैठक सभी सोशल साइटों पर ही आयोजित हुईं और हो रही हैं। शुक्रवार को इस कड़ी में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद यानी नेशनल असेसमेंट एंड अके्रडिशन काउंसिल (नैक) ने ’आचार्य देवो भवः’ नाम से एक वेबिनार आयोजित किया, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक मुख्य अतिथि थे। सुखद आश्चर्य यह कि इस वर्जुअल प्रोग्राम में लगभग 12 लाख लोगों ने एक साथ भाग लिया। वेबिनारों में यह संख्या शायद अब तक हुए कार्यक्रमों में सबसे अधिक हो सकती है।


कोरोना ने आदमी को एक प्रकार से पंगु बना दिया है। कुछ समय पहले की बात करें तो मनुष्य घरों में कैद रहने को विवश हो गया था। अब भी बहुत आवश्यक कार्य के लिए लोग बाहर निकल रहे हैं। शादी-विवाह, शवया़त्रा जैसे पारंपरिक संस्कारों तक का स्वरूप बदल चुका है, लेकिन कहते हैं कि किसी समस्या का समाधान भी अवश्य होता है। शैक्षिक जगत ने आवश्य कार्यों के संपादन के लिए इस दौरान सोशल साइट का सहारा लिया और आवश्यक बैठकें, वेबिनार, कक्षाएं और यहां तक कि परीक्षाएं भी आॅनलाइन ही की जाने लगीं। इससे कोरोना से तो बचाव हुआ ही, आवागमन के साथ ही आयोजनों पर खर्च होने वाले पैसे की भी बचत हुई।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सोशल साइट का खूब सदुपायोग किया जा रहा है। शुक्रवार को नैक की ओर से एक वेबिनार आयोजित किया गया। ’आचार्य देवो भवः’ नामक इस कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। कार्यक्रम के आयोजन से संबंधित आंकड़ों के अनुसार इस कार्यक्रम में आईआईटी और आईआईएस के 79 निदेशकों ने भाग लिया। गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में 330 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और 31 हजार एससोएिसट और असिस्टेंट प्रोफेसरों ने इसमें शिरकत की, जबकि तीन हजार प्राचार्य इसमंे शामिल हुए और अन्य प्रतिभागियों की संख्या 1 लाख, 51 हजार थी। कुल 11 लाख, 80 हजार विद्वान इस कार्यक्रम के साक्षी बने, जो वेबिनार जैसे अब तक के कार्यक्रमों का अपने आप में एक रिकाॅर्ड हो सकता है।
इस कार्यक्रम में डाॅ. निशंक ने कहा कि भारत ’गुरु-शिष्य परंपरा’ का देश है। यह भूमि ज्ञान, तपस्या और साधना की भूमि है। गुरुओं के समक्ष श्रद्धावनत होना हमारी समृद्ध परंपरा का हिस्सा है। गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने वाला आजीवन सौभाग्य से युक्त रहता है। उन्हांेने कहा कि जितने प्रतिभावान एवं कर्मठ हमारे शिक्षक होंगे, उतनी ही प्रतिभावान एवं कर्तव्यपरायण हमारी आने वाली पीढ़ी होगी। इसके लिए हमारे शिक्षकों को नवाचारयुक्त शिक्षण पद्धतियों को अपनाना होगा। हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में हमारे शिक्षकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी। आज समय आ गया है कि सभी शिक्षक, आयार्य, प्राचार्य और कुलपति सब मिलकर अपनी प्रतिभा, ज्ञान एवं कर्मठता से भारत को ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित करें।

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