निशंक ने कहा भारत के लिए विश्व एक परिवार है जबकि पश्चिम के लिए यह एक व्यापार

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देहरदून। अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर दिल्ली के सेंट्रल हॉल में आज दिनांक 22 फरवरी 2020 को “मानवाधिकार: राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय मुद्दे और चुनौतियां” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (22 व 23 फरवरी) के उद्घाटन सत्र का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन शैक्षिक फाउंडेशन और डॉक्टर अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर द्वारा देशबंधु कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय और चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी, हरियाणा के सहयोग से सामूहिक रूप से आयोजित किया जा रहा है।
इस दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन उद्घाटन सत्र के अलावा दो पूर्ण सत्र और 3 तकनीकी सत्र का भी आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि एचआरडी मिनिस्टर, भारत सरकार, माननीय रमेश पोखरियाल निशंक जी और विशिष्ट अतिथि यूजीसी चेयरमैन प्रोफेसर डीपी सिंह जी थे। उद्घाटन सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई उसके बाद देशबंधु कॉलेज के छात्र और छात्राओं ने मिलकर सरस्वती वंदना का गायन किया।
उद्घाटन सत्र के दौरान मानव अधिकार पर बात करते हुए श्री निशंक ने भारतीय व पाश्चात्य दृष्टिकोण के अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि भारत के लिए विश्व एक परिवार है जबकि पश्चिम के लिए यह एक व्यापार है। भारतीय दृष्टिकोण हमें सहयोग करना सिखाता है जबकि पश्चिमी दृष्टिकोण उन्हें प्रतिस्पर्धा पर आधारित व्यापार करना सिखाता है।और यही वह अंतर हैf जो भारत और पश्चिम के मानवाधिकार के दृष्टिकोण को भी एक दूसरे से अलग करता है।
इस अवसर पर विशेष अतिथि माननीय डीपी सिंह जी ने मानवाधिकार की चुनौतियों का जिक्र करते हुए आतंकवाद, भ्रष्टाचार, असमानता और भेदभाव को मानव अधिकार के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती के रूप में रेखांकित किया।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता ABRSM के अध्यक्ष प्रोफेसर जे. पी. सिंघल जी ने मानवाधिकार पर भारतीय परंपरा की रूपरेखा के साथ की। सत्र के शुरुआत में देशबंधु कॉलेज के प्राचार्य डॉ राजीव अग्रवाल ने अपना संभाषण मंच पर बैठे अतिथि और विशिष्ट अतिथियों के परिचय से किया तथा इसका समापन आर्यभट्ट कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ मनोज सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र का मंच संचालन NCWEB की डायरेक्टर सुश्री गीता भट्ट ने किया।
उद्घाटन सत्र के उपरांत पहले पूर्ण सत्र की शुरुआत हुई जिसकी अध्यक्षता न्याय एवं कानून मिनिस्टर श्री रविशंकर प्रसाद ने किया। इस सत्र के मुख्य वक्ता डॉ प्रफुल्ल केतकर जो ऑर्गेनाइजर के संपादक हैं, ने अपनी बातों को रखते हुए जोर देकर कहा कि भारत की आत्मा ही लोकतांत्रिक है इसलिए पश्चिम हमें मानवाधिकार की धारणा बताने का दुस्साहस ना करे।
उद्घाटन सत्र, पूर्ण सत्र के अतिरिक्त आज के इस प्रथम दिवसीय सम्मेलन में वैदिक युग में मानवाधिकार, धर्म और मानवाधिकार तथा महिला और मानवाधिकार नाम से तीन तकनीकी सत्र का भी आयोजन किया गया।
एक सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने मानवाधिकार के मुद्दे पर भारतीय चिंतन की धारणाओं को विमर्श के केंद्र में लाने के लिए प्रतिभागियों से अनुरोध किया क्यूंकि प्राचीन भारतीय दर्शन में ही इससे जुड़े सारे प्रश्नों के उत्तर है। ऑर्गनाइजर के संपादक डॉ प्रफुल्ल केतकर ने भी इसीपर बल दिया।
तीनों तकनीकी सत्र के उपरांत दूसरे पूर्ण सत्र की अध्यक्षता पूर्व संसद सदस्य डॉ. बलवीर पुंज और मुख्य वक्ता NGT के सदस्य न्यायविद राघवेंद्र सिंह राठौड़ के वक्तव्य के साथ संपन्न हुआ।
आज के इस कांफ्रेंस में कैबिनेट मंत्रियों, संसद सदस्यों, विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलपतियों, अकादमिक संस्थान व अनुसंधान निकाय के प्रमुखों, विविध क्षेत्र के वरिष्ठ विद्वानों व विशेषज्ञों, न्यायपालिका के सदस्यों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, समाज वैज्ञानिकों, सार्वजनिक विषय से संबंधित मुद्दों पर विचार करने वाले बौद्धिकों व पर्यावरणविदों के साथ-साथ युवा शोधकर्ताओं इत्यादि की भी भागीदारी दिखाई दी।
डॉ संजय कुमार, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, ABRSM ने कहा कि इस दो दिवसीय अकादमिक कांफ्रेंस में मानव अधिकार से संबंधित विभिन्न विषयों पर तीन पूर्ण सत्र और 9 तकनीकी सत्र का आयोजन होने वाला है। जिसके अंतर्गत 100 विभिन्न संस्थानों के 500 से अधिक विद्वान मानव अधिकार के विभिन्न पहलुओं पर एक सक्रिय व सार्थक बौद्धिक विमर्श को अंजाम देने वाले हैं। कल के समापन सत्र को केरल के गवर्नर महामहिम श्री आरिफ मोहम्मद खान संबोधित करेंगे।

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