किसान हित में है कानून, सच तो जानिएः डाॅ. निशंक

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा-दो दशक से तैयार हो रही थी इस कानून की जमीन

बरगलाया जा रहा कृषकों को, हम अन्नदाता को मनाकर रहेंगे

देहरादूनः किसान कानून किसानों के हित में है। यह कानून एक दिन में नहीं बना, 20 साल पहले इसकी जमीन तैयार होनी आरंभ हो गयी थी। एमएसपी, मंडियों, जमीनों आदि को लेकर किसान भ्रमित हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि नए कानून से न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था खत्म नहीं होगी, एपीएमसी मंडिया बंद नहीं होंगी, किसानों की जमीनें सुरक्षित रहेंगी, उन्हें कोई नहीं छीन सकता तथा किसानों का एग्रीमेंट द्वारा कोई बंधन नहीं होगा। सरकार अपने अन्नदाता की समृद्धि के लिए संकल्पबद्ध है, लेकिन किसानों को विपक्ष द्वारा बरगलाया जा रहा है। उन्हें सच जानना चाहिए।
यह बात केंद्रीय शिक्षा मंत्री और हरिद्वार के सांसद डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कही। उन्होंने कहा कि पिछले सत्तर वर्षों में पहली बार नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों के हित में इतना बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी का सपना किसानों की आय को दुगुना करना है। किसानों की मांग पर ही यह कानून बना है। नए कानून के अनुसार किसान अपने अनुसार अधिक दाम के लिए खरीदार से मोल-भाव कर सकते हैं, वे एपीएमसी मंडियों में और बाहर भी जहां अधिक दाम मिले, वहां अपने उत्पाद बेच सकते हैं, एमएसपी सिस्टम बंद नहीं होगा, फसल के मूल्यों में अप्रत्याशि उतार-चढ़ाव से मुक्ति मिलेगी और उनकी आमदनी बढ़ेगी। किसान की उच्च मूल्य की नई किस्म की फसलों के लिए बाजार उपलब्ध हो पाएगा। यह बात महत्त्वपूर्ण है कि फसल बुआई से पहले और कटाई के बाद दोनों स्थितियों में उसके सामने कमाई के बेहतर विकल्प होंगे।
डाॅ. निशंक ने कहा कि किसानों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है कि एमएसपी व्यवस्था समाप्त होने, एपीएमसी मंडियां बंद हो जाएंगी, किसानों की जमीनेें खतरे में पड़ जाएंगी, किसानों पर बकाया वसूलने के लिए कांट्रैक्टर जमीनें हड़प लेंगे, कांट्रैक्ट फाॅर्मिंग के मामले में किसानों के लिए मूल्य की कोई गारंटी नहीं होगी, किसानों को भुगतान नहीं किया जाएगा, किसान कांट्रैक्ट को खत्म नहीं कर सकेगा। इन बातों में लेशमात्र भी सच नहीं है। जबकि सच यह है कि परिस्थितियां कोई भी हों, किसान की जमीन को आंच नहीं आएगी। एग्रीमेंट फसलों के लिए होगा, न कि जमीन के लिए। सेल, लीज और गिरवी समेत जमीन के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण का करार नहीं होगा, एमपीएमसी मंडिया इस कानून के दायरे से बाहर हैं। फाॅर्मिंग एग्रीमेंट में कृषि उपज का खरीद मूल्य दर्ज किया जाएगा। क्या यह प्रावधान किसान हित में नहीं है कि किसान का भुगतान तय सीमा न करने पर कानून कार्रवाई होगी और जुर्माना लगेगा? एक सच यह भी है कि किसान किसी भी समय बिना जुर्माने के कांट्रैक्ट खत्म कर सकेंगे।
केंद्रीय मंत्री डाॅ. निशंक ने इन बिंदुओं को गंभीरता से समझने के लिए किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि किसान कानून एक दिन में नहीं बना है। इसके लिए लंबा मंथन चला है। इसके लिए दो दशक तक अध्ययन और चिंतन चला है। वर्ष, 2000 में शंकर लाल गुरु कमेटी से इसका आरंभ हुआ था। इसके बाद 2003 में माॅडल एपीएमसी एक्ट, 2007 के एपीएमसी रूल्स, 2010 में हरियाणा, पंजाब, बिहार एवं पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों की समिति व 2013 में दस राज्यों के कृषि मंत्रियों की संस्तुति, 2017 के माॅडल एपीएलएम एक्ट के बाद आखिरकार 2020 में संसद ने इस कानून को मंजूर किया। किसानों के आंदोलन को सुलझने पर आश्वस्त डाॅ. निशंक का कहना है कि हम किसानों को मनाएंगे और हमें उम्मीद है किसान अवश्य हमारी सरकार की बात मानेंगे।

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