फरवरी के बाद होंगी बोर्ड परीक्षाएं

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शिक्षकों से वर्चुअल संवाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. निशंक ने कहा

स्कूली शिक्षा से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का ज्ञान देने वाला भारत पहला देश

देहरादूनः कोविड-19 के दृष्टिगत 2021 में बोर्ड परीक्षाएं निरस्त नहीं होंगी। जनवरी, फरवरी में ये परीक्षाएं नहीं होंगी, लेकिन फरवरी के बाद परीक्षाएं कराने को लेकर विचार किया जाएगा।
यह बात केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक ने मंगलवार को शिक्षकों से वर्चुअल संवाद करते हुए कही। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के चलते सीबीएसई 30 प्रतिशत तक पाठ्यक्रम कम कर चुका है, अनेक राज्यों ने भी सिलेबस कम किया है। इससे छात्रों से पढ़ाई का बोझ काफी कम हुआ है।
शिक्षकों के सवालों का उत्तर देते हुए और जिज्ञासाओं शांत करते हुए तथा सुझावों पर प्रतिक्रिया देते हुए डाॅ. निशंक ने कहा कि छात्रों में पढ़ाई के साथ ही नैतिक मूल्यों का बीजारोपण भी बहुत आवश्यक है। हमने बच्चों को मशीन बना दिया है। हमारा ध्यान पैकेज पर है। अतः हमें बच्चों को सहिष्णु, अहिंसक, सहनशील, विचारवान, संस्कारवान, प्यार बांटने वाला, नैतिक मूल्यों वाला बनाना है। हमें उसकी डिग्री के साथ-साथ उसके मनुष्य होने की परवाह भी करनी है। नई शिक्षा नीति इसी बात पर केंद्रित है।
एक शिक्षक के सवाल पर कि क्या सभी परीक्षाएं आॅनलाइन नहीं हो सकतीं? इस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. निशंक ने कहा कि यह कठिन कार्य तो है, लेकिन किया जा सकता है, परंतु इस पर समय लेगगा, क्योंकि प्रत्येक छात्र के लिए एक कंप्यूटर और एक मोबाइल फोन की आवश्यकता होगी।
एक शिक्षक के इस सुझाव पर कि कोरोना काल में छात्रों को योग और खेल के बारे में जागरूक करना जरूरी है, इस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि योग के बल पर ही अनेक छात्र कोरोना काल में अवसाद की स्थिति में जाने से बचे। हमारे अध्यापकों ने अनेक छात्रों को व्यस्त रहने के लिए प्रेरित किया। हमने ’माई बुक, माई फ्रेंड’ अभियान चलाकर उनमें रचनात्मकता पैदा करने का प्रयास किया। ’मनोदर्पण’ कार्यक्रम ने अनेक छात्रों और अभिभावकों की सहायता की। इस कायक्रम के कारण अनेक बच्चे अवसादग्रस्त होने से बचे।
एक अध्यापिका ने सुझाव दिया कि शिक्षकों को सैद्धांतिक के साथ ही व्याववाहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाए। इस पर डाॅ. निशंक ने कहा कि हमने कोरोना काल में शिक्षकों के लिए ’निष्ठा’कार्यक्रम चलाया, इसलिए आॅनलाइन शिक्षा में सफल रहे हैं। हम इस विषम परिस्थिति में 25-30 करोड़ छात्रों को आॅनलाइन शिक्षा दे पाए हैं।
आॅनलाइन शिक्षा की बाधाओं पर आए एक सवाल पर डाॅ. निशंक ने कहा कि इसमें बाधाएं धीरे-धीरे दूर होंगी। दीक्षा प्लेटफाॅर्म ने काफी बाधाएं दूर की हैं। राज्य इस पर अपने पाठ्यक्रम डाल रहे हैं।
पुस्तकों के ज्ञान को व्यावहारिक जीवन के प्रसंगों से जोड़ने के एक सुझाव पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. निशंक ने कहा कि वास्तव में पुस्तक का ज्ञान रोचक बनाने के बाद ही शिक्षक छात्र के अंदर प्रवेश कर सकता है। हम इस मसले पर गंभीरता पूर्वक विचार कर रहे हैं। ऐसी शिक्षा को लेकर हमने एक कमेटी बनाई है, जिसकी रिपोर्ट शीघ्र आने वाली है। हमारी नई शिक्षा नीति इसी बात पर केंद्रित है।
एक शिक्षक ने सुझाव दिया कि नवीं कक्षा से व्यावसायिक शिक्षा शुरू की जाए। इस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. निशंक ने कहा कि हम तो व्यावसायिक शिक्षा कक्षा-6 से ही दे रहे हैं। अनेक स्कूल ऐसा कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि बच्चा जब स्कूल से निकले तो किसी पर भार न बने। हम दुनिया के पहले देश हैं, जहां स्कूली शिक्षा से ही आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का ज्ञान दिया जा रहा है।

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