मोदी और अमित शाह नए भारत निर्माण के शिल्पी-निशंक

देहरादून। आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ऋषिकेश के दीक्षांत समारोह में भारत के गृह मंत्री श्री अमित शाह जी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन एवं केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सिरकत की इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी उपस्थित रहे।

AIMS के दीक्षांत समारोह में सम्मलित हुए अमित शाह

AIMS के दीक्षांत समारोह में सम्लित हुए अमित शाह।

अध्यापकों, छात्रों और अधिकारियों को स्वर्ण जयंती और दीक्षांत समारोह के लिए निशंक ने से बधाई दी।

निशंक ने कहा कि एम्स जैसे संस्थानों की परिकल्पना एवं इसका संवर्द्धन भारत के युवाओं की शैक्षिक योग्यता को निखारने के लिए ही की गई थी।हमें इस बात पर गर्व करने का अवसर है कि यह संस्थान अपने उद्देश्य में सफल ही नहीं हुएअपितु भारत के बौद्धिक पथ को प्रशस्त करने में अग्रणी भूमिका भी निभा रहे हैं ।

हमारे संस्थानों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का शिक्षण भी राष्ट्रहित और विकास के उद्देश्य से किया जाता है। इसलिए जो लोग राष्ट्रवाद और आधुनिक उच्चशिक्षा व्यवस्था में विरोधाभास देखते हैं वो भूल करते हैं।

आधुनिक विश्व में जिस प्रकार से ऊहापोह मचा हुआ है| उसमें भारत जैसे प्राचीन और संस्कृति सम्पदा से धनी देश की भूमिका बलवती होती जा रही है। हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ने जिस दृढ़शक्ति और कुशलता से भारत की गरिमा को विश्वपटल पर पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया है उसकी हर तरफ प्रशंसा हो रही है। प्रधानमंत्री जी के एक भारत श्रेष्ठ भारत के संकल्प को पूर्ण करने में हमारे शिक्षण संस्थान अद्वितीय योगदान कर सकते हैं, हमारी प्राचीन धरोहर को पुनर्प्राणित कर सकते हैं।

निशंक ने नई शिक्षा नीति को लेकर कहा कि, संस्थान वर्तमान सरकार की नई नीतियों का भरपूर लाभ उठाते हुए आधुनिक तकनीक का उपयोग करेंगे जिससे कि अधिकाधिक युवावर्ग को उच्च शिक्षा का लाभ मिल सकेगा। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि एम्स में शिक्षा के स्तरोन्यन के अनेक प्रयास हुए हैं जिसकी हम सराहना करते हैं।
भारत के युवावर्ग को कौशलकारी शिक्षा प्रदान करने का जो प्रण हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ने लिया है उसमें हमारी सहभागिता आवश्यक है। भारत को पुनः एक बार विश्वपटल पर अग्रणी देश कैसे बनाया जाए,युवा को जीविकोपार्जन का प्रशिक्षण किस प्रकार से मिले ऐसा प्रयास हम सभी को करना है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को ऋषि-मुनियों की नगरी ऋषिकेश में स्थापित करने में हमारे दूरदर्शी पूर्व प्रधानमंत्री माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का विशेष योगदान है। एम्स, ऋषिकेश का नींव पत्थर 1 फरवरी 2004 को रखा गया था एवं तत्पश्चात संस्थान के अभियात्रिंकी विभाग द्वारा निर्माण कार्य प्रारम्भ किया गया था।

निशंक ने कहा कि,मुझे याद है संस्थान के मेडिकल कॉलेज का आधिकारिक उद्घाटन समारोह 20 सितम्बर 2012 को सम्पन्न किया गया और उसी साल 21 सितम्बर 2012 को 50 छात्रों के बैच के साथ एम.बी.बी.एस. की कक्षाएं शुरू की गईं एवं सन् 2013 में बी.एससी (ऑनर्स) नर्सिंग पाठ्यक्रम प्रारम्भ किया गया।मई 2013 को आउट-पेशेंट डिपार्टमेंट्स (ओपीडी) परामर्श प्रारम्भ करने के साथ संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष समानान्तर रूप से चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेंवायें प्रारम्भ कि गयी जो संस्थान में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

वर्तमान में संस्थान की ओ0पी0डी0निदान, डे-केयर एवं परामर्श सेवाओं की वार्षिक संख्या लगभग 8.5 लाख से अधिक है। संस्थान द्वारा वर्तमान में 54 ऑपरेशन रूम संचालित किये जा रहें है जिनमें अबतक लगभम में 60,000 से अधिक मरिज लाभान्वित हो चुके हैं। संस्थान की बैड क्षमता के अनुरूप अस्पताल में 960 बैड़ एवं ट्रॉमा केन्द्र में 100 बैड पूरी तरह से कार्यात्मक हैं।

यह प्रसन्नता का विषय है कि विश्व के अग्रणी संस्थानों की श्रेणी में एम्स ऋषिकेश को लाने के लिए शिक्षण और अनुसंधान पर बल दिया जा रहा है शिक्षण और अनुसंधान के नए विभागों और केंद्रों को स्थापित करने के लिए उत्सुक है, नए पाठ्यक्रम शुरू कर रहा है, लैंगिक समानता,महिला सशक्तिकरण, नवाचार, भेदभावविहीन वातावरण के सृजन और शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन कर रहा है।

निशंक ने छात्रों से आवाहन किया कि ईश्वर के बाद केवल चिकित्सक को ही भगवान का दर्जा दिया जाता है,इसलिए वह भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें।

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