अब विपक्ष की भाषा बोले बड़बोले भगत।



भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले-इस बार मोदी लहर काम नहीं आएगी

देहरादून।  विगड़ैल विधायक कुंवर प्रणसिंह चैंपियन को पार्टी में  शामिल करने के तुरंत बाद एक विवादित बयान देना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर भगत के लिए भारी नुकसानदेय साबित हो सकता है। इससे जहां विपक्षी खुश हैं, वहीं पार्टी के अंदरूनी तौर पर असहज हो गई है। इस बार सीधे-सीधे एक प्रकार से मोदी को चुनौती देते हुए भगत ने कह डाला कि आगामी विधानसभा चुनाव में मोदी के नाम का जादू नहीं चलने वाला, विधायकों को खुद परिश्रम करना होगा। भगत का यह बयान मोदी के नाम को कमतर तो आंकता ही है, त्रिवेंद्र सरकार की विफलता का परिचायक भी है। देखने वाली बात है कि भगत पर पार्टी इकाई कार्रवाई करती है या राष्ट्रीय नेतृत्व।

वंशीधर भगत उत्तराखंड भाजपा के आठवें अध्यक्ष हैं। कुर्सी संभालने के कुछ समय बाद ही उन्होंने हाल ही में पार्टी की बुरी तरह फजीहत करा डाली। शराब पीकर हथियारों के साथ डांस करने और उत्तराखंड पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले विधायक को उन्होंने पार्टी में शामिल कर दिया था। यह विवाद अभी सुलग ही रहा है कि भगत ने पत्रकारों को दिए एक इंटरव्यू में कह दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के सहारे नैया पार नहीं होगी, विधायकों को क्षेत्रों में जाकर परिश्रम करना होगा, अपनी प्रतिभा दिखानी होगी। इस बार पहले की तरह नहीं होगा कि मोदी के नाम से ही वोट मिल जाएंगे।

वंशीधर भगत के इस बयान के बाद भाजपा में अंदरूनी हलचल बढ़ गई है। भाजपा के बाहर संदेश चला गया है कि भाजपा में आंतरिक कलह बढ़ रही है और मोदी के नाम पर पार्टी में एका नहीं है। दूसरा संदेश यह गया है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार ऐसा कार्य नहीं कर पायी है कि आगामी विधानसभा चुनाव में जनता उसे दुबारा चुन सके। यदि त्रिवेंद्र सरकार ने विकासात्मक कार्य कराए होते तो विधायकों को वोट प्राप्त करने के लिए इतना कड़ा संघर्ष करने की आवश्यकता नहीं थी, जिसकी बात भगत कर रहे हैं। अर्थात् अप्रत्यक्ष तौर पर उन्होंने कह दिया है कि भाजपा सरकार प्रदेश में ऐसा कार्य नहीं कर पायी, जिससे इस बार जीत आसान हो।

बता दें कि पिछले साल छह साल के लिए पार्टी से निकाले गए कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को 13 महीने में ही अंदर करने वाले वंशीधर पर शीर्ष नेतृत्व खासा नाराज बताया जाता है। बताते हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा इसका संज्ञान लेकर फटकार लगा चुके हैं। अब भगत ने उन नरेंद्र मोदी के नाम को ही चुनौती दे डाली, जिस नाम के सहारे राज्य में पिछले विधानसभा चुनाव में अनेक विधायकों की चुनावी वैतरणी पार हुई थी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भगत के बयानों से संगठन में आंतरिक असहजता उत्पन्न हो गई है। उनके इस बयान पर राष्ट्रीय नेतृत्व कड़ा एक्शन ले सकता है। विपक्ष जैसी भाषा बोलने वाले भगत का यह बयान प्रदेश के पदाधिकारियों के लिए गले में गया गर्म दूध बन गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पदभार संभालने बाद ऐसे कारनामे करने वाले भगत को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

LEAVE A REPLY