बाधाओं से घबराता नहीं है साहित्य साधकः निशंक

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साहित्यकार आर.पी. डंगवाल के काव्य संग्रह ’अनुभूति के स्पंद’ का विमोचन

देहरादूनः केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक ने शुक्रवार को प्रसिद्ध साहित्यकार आर.पी.डंगवाल ’शिरीष’ के काव्य संग्रह ’अनुभूति के स्पंद’ का विमोचन किया। डाॅ. निशंक ने हिन्दी भाषा के लिए जा रहे श्री डंगवाल के प्रयासों की सराहना की तथा भाषा प्रेमी युवा पीढ़ी का आह्वान किया कि वह श्री डंगवाल से प्रेरणा ले।
विमोचन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डाॅ. निशंक ने कहा कि सच्चे साहित्यकार के कर्ममार्ग में कभी भी उम्र जैसी समस्याएं बाधा नहीं बन पाती हैं। साहित्यकार गद्य और पद्य विधाओं के माध्मय से अपने मन की बात और समाज में घटित घटनाओं को विभिन्न रूपों में उजागर करते हुए समाज की अप्रत्यक्ष रूप से सेवा करता है। इस अभिव्यक्ति में उसे असीम आनंद मिलता है। साहित्यकार आर.पी. डंगवाल को संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ साहित्यकार बताते हुए उन्होंने कहा कि श्री डंगवाल वर्षों से साहित्य साधना में लगे हुए हैं। जीवन के 80 वर्ष पूरे करने के बाद भी उनकी कलम अनवरत चल रही है। उन्होंने लेखन और कविता रचने में रुचि रखने वाली नई पीढ़ी का आह्वान किया कि वह श्री डंगवाल से प्रेरणा ले।
विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध साहित्यकार लीलाधर जगूड़ी ने कहा कि श्री डंगवाल अत्यंत जिज्ञासु व्यक्तित्व के काव्यमय जीवन जीने वाले अन्यतम सज्जन पुरुष हैं। वह हरेक से उम्मीद करते हैं कि वह कविता तो समझ ही लेगा। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय है। साहित्यकार श्री डंगवाल ने इस मौके पर इस पुस्तक में संग्रहीत अपनी कविताओं का परिचय दिया। इस मौके पर अनेक साहित्यकार उपस्थित थे।

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